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मामाजी की कुछ अविस्मरणीय यादें

    
Playing Benjo in the NCC Cultural Event


NCC Parade




Participated in the Delhi Republic Day Parade


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Mamaji - Backbone of the Family

बैकबॉन (रीढ़ की हडडी) जैसे शरीर का आधार होती है | या यू कहे की महत्वपूर्ण सपोर्ट सिस्टम | वैसे ही मामाजी बैकबॉन ऑफ़ द फैमिली थे | मतलब परिवार का आधार, सपोर्ट सिस्टम | या जो हर परेशानी में साथ में खड़े रहने वाला हो | या फिर यह भी कह सकते हो की हर बडे निर्णय में उनकी राय बहुत महत्वपूर्ण थी | उन्होंने परिवार में अपनी ऐसी जगह बना ली थी | सारी समस्याओ में साथ में डट कर खड़े रहना | दूसरो की परेशानियों को भी अपनी परेशानी समझना, सबकी मदद करना उनकी आदत में था |    परिवार के किसी भी सदस्य के छोटे-मोटे काम में उपलब्ध होना | हर परेशानी में साथ खड़े होना और सबसे बड़ी बात यह है की मौजूद होना | आज के जमाने में हर कोई अपने कामो में बिजी है | लेकिन वो हमेशा अपने कामो को छोड़कर परिवार के छोटे बड़े काम में या फिर किसी भी समस्या में साथ में खड़े होते थे |       मुझे तो आज भी याद है की मेरी मम्मी को कुछ भी समस्या आती तो वो पहला फोन कॉल मामा को ही करती थी | और मामाजी झटपट अपने सारे कामों को छोड़कर आ जाते थे | ये उनकी बहुत बड़ी बात...

दावत

 मामाजी को सभी परिवारजनों को बुलाने और खाना खिलाने का बहुत शौक था | चाहे खेखरा(a day after Diwali) हो या ठंडी राखी (a day after Rakhi) हो या और कोई त्यौहार या अवसर | सभी को फ़ोन करना और घर पर दावत के लिए बुलाना आम बात थी |  मामाजी को खाना बनाने और खिलाने का बहुत शौक था | मेरा तो ज्यादातर बचपन मामाजी के यही निकला तो मुझे  याद है कुछ चीजें मामा ही बनाते थे | खिचड़ी, रविवार के पोहे, अण्डा भुरजी, नॉन वेज, बिरयानी आदि |  जब भी कुछ स्पेशल बनाते थे तो अपनी बहनो के घर भेजने का बहुत था | मेरे घर पर भी मामा के यहाँ से आये दिन कुछ न कुछ परोसा आता ही था |    जब भी घर पर कुछ खाना होता और नॉन वेज बनता तो मामाजी ही बनाते थे | उस समय youtube तो नहीं था पर वो नयी नयी रेसिपी खुद से ही try करते थे | गर्मियाँ हो तो मेनू में नॉन वेज - बाटी या फिर वेज में दाल - बाटी - चूरमा या खीर - पुड़ी और सर्दियाँ हो तो नॉन वेज - मक्की के ढोकला या वेज में दाल - ढोकला, दाल - बाटी -चूरमा, खिचड़ी का कॉम्बिनेशन होता  था | एक चीज़ जो मुझे आज भी बहुत याद आती ...